Essay Writing In Hindi Topic Bhukamp In Gujarat

According to a recent study conducted by National Institute of Disaster Management about 59 percent of the area in India is prone to earthquakes. India is divided into 4 seismic zones.

Zone 5 - Very High-Risk Area - 11 % of land area in India is considered as high risk. List of states that fall in this zone are Arunachal Pradesh, Assam, Nagaland, Mizoram, Meghalaya, Tripura, Central Kashmir, Central Himalayas, Northern Bihar, Rann of Kutch, and Andaman and Nicobar Islands.

Zone 4 - High Risk Zone - 18 % of land area - Some parts of Jammu and Kashmir, Uttarakhand, Delhi, Gujarat, Bihar, West Bengal, Koynanagar in Maharashtra, and the whole of Sikkim lie in this zone.

Zone 3 - Moderate Risk Zone - 30 % of land area - Some parts of Haryana, Punjab, Rajasthan, Gujarat, Maharashtra, Telangana, Andhra Pradesh, Uttar Pradesh, Jharkhand, West Bengal, Odisha, Madhya Pradesh, Bihar, Karnataka, Tamil Nadu, and the whole of Dadra and Nagar Haveli, Goa, and Kerala fall in the risk zone.

Zone 2 - Low-risk Zone - 41 % of land area - See below the map to know areas covered in this zone.

देश मना रहा था गणतंत्र दिवस, गुजरात में मचा था मौत का तांडव

divyabhaskar network | Last Modified - Jan 25, 2016, 07:47 PM IST

देश को इस घटना की जानकारी मिल पाती, तब तक भुज व कच्छ के श्मशान व कब्रिस्तान लाशों से पट चुके थे।
  • कच्छ (गुजरात)। यह 26 जनवरी, 2001 का दिन था। पूरा देश सुबह गणतंत्र दिवस की खुशियां मना रहा था। लेकिन खुशी के इसी मौके पर गुजरात में मातम छा गया था, क्योंकि यहां के दो जिले कच्छ व भुज की धरती को 6.9 रिएक्टर की तीव्रता वाले भूकंप ने कंपाकर रख दिया था।
    ताश के महल की तरह बिखर गईं थीं इमारतें...
    लोग कुछ समझ पाते ही कुछ ही सेकंड में बड़ी-बड़ी इमारतें ताश के महल की तरह जमींदोज होने लगीं थीं। धरती की कंपकंपी सिर्फ दो मिनट की ही थी, लेकिन इसी दो मिनट में सब खत्म। अब खुशी की आवाजें दर्द की चीखों में तब्दील हो चुकी थीं। जब तक पूरे देश को इस घटना की जानकारी मिल पाती, तब तक कच्छ व भुज में श्मशान व कब्रिस्तान लाशों से पट चुके थे।
    घटना आंकड़ों में...
    दिन : 26 जनवरी, 2001
    समय : सुबह 8.46 मिनट
    कंपन : 2 मिनट
    एपी सेंटर : चोबारी गांव, भचाऊ तहसील से 9 किमी और भुज से 20 किमी की दूरी पर।
    तीव्रता : 6.9 रिएक्टर स्केल
    भुज में मौत : 20 हजार
    घायल : 1,67,000
    मकानों की तबाही : 4 लाख
    भूकंप का असर : 700 किमी तक। 21 जिले के 6 लाख लोग बेघर हुए।
    कच्छ जिले में मौत : 12,290
    इस भयानक प्राकृतिक आपदा में कच्छ के 450 गांवों का तो नामोनिशान ही मिट गया था।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, मौत के बड़े आंकड़े का कारण...
  • मौत के बड़े आंकड़े का मुख्य कारण :
    भुज सीज्मिक जोन-5 में है, जो कि भूकंप के लिहाज से बेहद खतरनाक है। यहां अक्सर भूकंप के झटके आते रहते हैं। इसके बावजूद भी इसकी अनदेखी की गई थी। शहर की आबादी घनी होती चली गई। हालांकि भूकंप की वजह से उस समय भी तीन मंजिला मकान बनाने की ही परमीशन थी, वह भी भूकंपरोधी तकनीकों के आधार पर, लेकिन लोगों ने इसकी परवाह नहीं की। कईयों ने छह-छह-सात-सात मंजिला तक के मकान बना लिए थे।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, प्रशासन की भी लापरवाही:
  • दूसरी तरफ प्रशासन ने भी इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। दौड़ती-भागती जिंदगी में प्रशासन सहित शहरवासियों को भी इस बात का ख्याल नहीं रहा कि अगर किसी दिन अधिक तीव्रता वाला भूकंप आ गया तो उसके नतीजे क्या होंगे। आखिरकार वही हुआ, जिसका डर था। 26 जनवरी 2001 को भुज की धरती हिली और हजारों मकान जमींदोज हो गए। मकानों के मलबे में ही हजारों जिंदगिया खत्म हो गईं तो लाखों बेसहारा।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, अस्पताल, ब्रिगेड के ऑफिस भी नहीं बचे थे:
  • अस्पताल, ब्रिगेड के ऑफिस भी नहीं बचे थे:
    अस्पताल, फायर ब्रिगेड और सरकारी विभागों के दफ्तर भी भूकंप का शिकार हो गए थे, जिसकी वजह से राहत कार्य में बाधा आई। दूसरी ओर हजारों इमारतों के मलबे ने तंग गलियों और संकरी सड़कों को ढंक लिया था। इस कारण भी राहतकर्मियों को अपने संसाधनों के साथ घटनास्थल तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, भूकंप के बाद प्रशासन के प्रयास:
  • प्रशासन के प्रयास :
    तबाही के बाद शहर की नए सिरे से प्लानिंग की गई और पुनर्वास की जिम्मेदारी भुज एरिया डेवलेपमेंट अथॉरिटी की दी गई। सबसे पहले इस नियम को लागू किया गया कि शहर में कोई भी इमारत दो मंजिल से ऊंची नहीं बनाई जा सकती। इसके अलावा उसका नक्शा भी भूकंपरोधी तकनीकों के अनुसार ही बनेगा। शहर को सुनियोजित तरीके से बसाने के लिए तंग गलियों को खत्म करते हुए चौड़ी-चौड़ी सड़कों का निर्माण किया गया। इसी वजह से भुज शहर, जो 2001 में तकरीबन उजड़ गया था। आज उसकी तस्वीर बदल चुकी है।
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  • विकास के लिए खेला दांव...
    राज्य सरकार ने जिले के विकास के लिए लुभावने ऑफर देकर उद्योगपतियों को आकर्षित किया। कंपनियों को प्लांट खड़े करने के लिए जमीन कौड़ियों के भाव में दी गईं। टैक्स में भारी कमी कर दी गई। कंपनियों को सारी सुविधाएं मुहैया कराई गईं। सागर किनारे बसे होने के कारण बिजनेसमैनों को भी यह सौदा पसंद आया। इसी वजह से आज कच्छ में देश-विदेश की सैकड़ों कंपनियां हैं।

    आगे की स्लाइड्स में देखें, भूकंप की अन्य फोटो:
Web Title: Images For Earthquake In Kutch In 2001 At Gujarat
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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